
लड़की ने उँगली से लटों को कान के पीछे किया और लड़के से बात करने लगी। पिछले १५ मिनट ने वह छह बार ऐसा कर चुकी थी। लड़की जितनी बार भी ऐसा करती थी लड़के को और मादक लगने लगती थी। लड़का बात करते-करते नजर बचा कर उसकी टीशटॆ और जींस के बीच की मांसल जगह को देख रहा था। लड़की की कमर पर चुचुहा रहीं पसीने की बूँदे लड़के के मन में झुरझुरी पैदा कर रही थीं। लड़की की नाभि में एक चाँदी का छल्ला फँसा था। यह काम कुछ दिन पहले लड़के ने अपने खचॆ पर करवाया था। इस छोटे से काम के लिए उसने अपने जोड़े हुए रुपयों में से तीन हजार खचॆ कर दिए थे। पहले तो लड़की इसके लिए तैयार नहीं थी पर लड़के काफी समझाने के बाद मान गई। लड़की जब नाभि में चाँदी का छल्ला पहन कर पालॆर से बाहर निकली तो लड़के की आखों में अजीब सी चमक कौंध गई। असल में लड़की ने अपनी लंबी टीशटॆ मोड़ कर ऊँची कर ली थी जिससे नाभि का छल्ला दिख सके। फिर दोनों जनपथ गए। लड़के ने लड़की के लिए तीन टीशटॆ खरीदीं। शाटॆ टीशटॆ यानी फैशन के अनुकूल। कूल...।असल में यह खरीदारी कुछ ऐसे हुई। दोनों जनपथ पहुँचे। चलते-चलते लड़के ने धीरे से लड़की की कमर पर अपना हाथ लपेट दिया। ऐसा पहली बार हुआ था पर लड़की शरमाई नहीं। नाभि में छल्ला पहनने के बाद उसके अंदर कुछ बदल गया था। दोनों टहलते रहे। लोग उन्हें घूरते रहे। धीरे-धीरे वे बेपरवाह हो गए। तभी लड़की के कुछ दोस्त मिल गए। लड़की उनसे बतियाने लगी, लड़का बोर होने लगा। लड़की को बताए बगैर लड़का एक दुकान में घुस गया। उसने तीन टीशटॆ खरीदीं। बाहर आया तो लड़की के दोस्त जा चुके थे उसकी नजरें लड़के को तलाश रहीं थीं। लड़का, लड़की के पास गया और उसके हाथ में एक पैकेट थमा दिया। इसमें तुम्हारे लिए दो टीशटॆ हैं घर जा कर देखना।लड़की घर पहुँची और उस पैकेट के साथ अपने कमरे में बंद हो गई। उसने टीशटॆ निकालीं। एक टीशटॆ पर आई और दूसरी पर यू लिखा। लड़की अचानक खिल उठी। चेहरे पर लटक रही बालों की लट उसने उँगली से पीछे की। आइने में खुद को देखा। उसका चेहरा सुखॆ हो रहा था। मन हुआ कि दोनों हथेलियों से अपना चेहरा ढक ले लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। वह लड़िकयों की इस अदा को बदलना चाहती थी। बोल्ड बनना चाहती थी। उसने लड़के को एसएमएस किया। तीसरी टीशटॆ कब मिलेगी? जवाब आया-कल। लड़की ने फिर पूछा कहाँ? सुबह छह बजे बस स्टैंड पर मिलो, दोस्त के फामॆ हाउस चलते हैं।फामॆ हाउस की घड़ी दोपहर के तीन बजा रही है। लड़का बेड पर बेसुध सो रहा है। लड़की ने कमरे को सिगरेट के धुएँ से भर दिया है। सामने लगे आइने में लड़की खुद को देखने की कोशिश कर रही है पर धुआँ घना था। छुएँ एक गुबार आइने के सामने से हटता है। आइने में लड़की का अक्स उभरता है। उसकी टीशटॆ पर लिखा है लव। तभी लड़के के फोन पर एसएमएस आता है। लड़की फोन उठाती है। इन बाक्स खुलता है। टीशटॆ का खेल सफल रहा? लड़के का कोई दोस्त पूछ रहा है। लड़की धम्म से बेड पर गिर जाती है। कुछ देर बाद लड़की अपने फोन में वूमेन हेल्पलाइन का नम्बर ढूंढ रही है। लड़की ने नंबर मिलाया पर घंटी जाने से पहले ही फोन काट दिया। वह सोच में है यह रेप है या उसकी बोल्डनेस...............आप बताइए.........।
17 comments:
ये आधुनिक नारी का मुखौटा है, जिसे आजादी चाहिये कुछ भी करने की भले ही वो समाज की नजरों में गलत हो।
वाह!लड़की को आधुनिकता के हवाले से चने के पेड़ पर चढ़ाओ,
अपना मतलब गांठो.आधुनिकता का बढ़िया "यूज" हो रहा है.
अन्धानुकरण में ठगा जाना तय है. दरअसल हमारा मस्तिष्क चमकती चीजों स्वाद लेना चाहता है. जंकफूड फास्टफूड की तरह जिस्म की कीमत तो नहीं लगाई जा सकती न . डॉलर की प्यास वाला मध्यवर्ग कुछ भी पीना चाहता है. पर समाज तो वहीँ है. इसलिए सामाजिक वर्जनाएं तोड़ने के अपने खतरे हैं. अफ़सोस इस विनाश में पहले की तरह आज भी पछताना स्त्री को ही पड़ रहा है. शायद ये मजबूरी हर काल में औरत को डसती रहेगी.
उस खोखली मानसिकता का कोई इलाज़ नहीं है जो व्यक्तित्व से ज्यादा व्यक्तिगत प्रदर्शन को, विचार से ज्यादा विलास को और व्यवहारिक होने से ज्यादा व्यावहारिक दिखने को महत्व देती है..बोल्ड होने के कई और तरीके हैं..उस लड़की ने जो रास्ता चुना उसकी मंजिल वही थी जहाँ वो पहुंची..ये लड़की कभी किसीको फ़ोन नहीं कर पायेगी.. महिलावादियों को उस लड़के का शुक्रिया अदा करना चाहिए जिस ने लड़की को तीन टी शर्ट दे कर लड़को की बराबरी पे ला खडा किया.
Male dominated society.... what so ever females can do they are always supressed.... some or the other way....
but the scenario gonna change very soon... n so call male dominated society will face the........
Himanshu
Watever happened does not at all justifies that the girl was made a fool. The fault was equal at her part as well. No doubt de guy was trying 2 fool her but is dis justified on de girl's part dat u sleep wid a guy who just proposed u a day back. It was all his foolishness dat she wasnt able 2 see de trap laid by the guy. If today's women declare 2 b so competant den dey shd b aware n shd keep der eyes wide open in dis male dominated society. The simple reason is de mentality of these men cant b changed dis fast as it has been deep rooted in der mentality dat dey dominate de society. Atleat women can take up de courage 2 tell dis society dat wat they r n wat they can do....
सब कुछ व्यक्ति की स्व मानसिकता का खेल है ....मुझे नही लगता की भारत जैसी मिस्रित संस्कृति से जो उत्तर मिलेंगे उनसे उस लड़की की उस लड़की की उहापोह का कुछ समाधान होगा..क्योकि मुझे लगता है उत्तरो का प्रतिशत संभवता 50-50 होगा ..मेरी राई मे तो लेखक महोदया के साथ साथ हम सभी पाठकों को भी अपनी राय देने से बचना चाहिए ..क्यूंकी इसका बेहतर निर्णय वो लड़की ही ले सकती है ... ...
सौरभ साहब
मेरे ब्लॉग पर टिप्पणी देकर मेरा होसला अफजाई करने के लिए तहेदिल से शुक्रिया
दुआंवों में याद रखें
aakhir kab tak male female k rishtay ko khonay paanay k najariyay say dekha jaayayga. aisay rishtaon may aisa hona swaabhaavik hai.kuch dhokay male kartay hain to kuch female. aisee cheeting he insaan ko asal jindgi k rishton ki haqeekat bataati hai.
yahan mudda boldness ya rape ka nahi hai...ladke ka maksad hi ladki ke bahut kareeb jane ka tha, tabhi to nabhi pr challa dekh uske hosh....kahani bayan karti hai...ladke ne laski ko Use kiya...jo aaj hota aa raha hai...ladki ne jara se bandhan khole to uska fayada uthaya gaya...jarurat hai us soch ko badlne ki jo...
इसे किस रूप में देखूं, यही समझने की कोशिश कर रहा हूं। कहानी या किसी रिपोर्ट का अंश। या फिर सामाजिक प्रवृत्ति का विश्लेषण। कई बार यह भी लगा कि एक गंभीर समस्या का सरलीकरण है। खैर जो भी हो, आपने एक अहम बात नए तरीके से कही है। बधाई।
यह आज के युवा है जो हर चीज़ मे अपना मतलब देखते हैं फिर चाहे वोह टीशर्ट लेने के लिया गया टाइमपास हो या फिर टीशर्ट के बहाने लड़की या लड़का दोनों ही उ़स उपभोक्तावादी संस्कृति को जीना चाहते है जो हम भारतियों पर लादी गयी है किसी को आधुनिकता जकड रही है तो कोई अपना मतलब सीधा कर रहा है लूट तो दोनों ही रहेहै लूटने वाले ने अपना विश्वास लोगो पर से खो दिया और जो सब कुछ लूटा कट पछता रही है उसका तो मर्द पर से विश्वास ही उठ गया यहाँ एक ने विश्वास खोया तो दूसरे ने इन्सनियात्त को गवां दिया
इला भटनागर
aadhunikta ka pata nahin aisa arth nikal liya gaya hai. mujhe yaad hai ek varishth patrkaar aur unki ek dost ke beech hui bahas ki. mahila mitra is baat per baar baar atak rahi thi ki cegrate aur sharab ladkiyan kyon na piyein. hum aadhunik kyon na banein. patrakaar mahodaya ka kahna tha aadhunik banne ka yeh matlab thode hi hai ki aap purushon ke durgun apna lein
kahir baharhaal kahani achhi lagi blog pahli baar dekh paya hoon ab regular dekhoonga. pradeep ji ke upanyas ke baare mein apna vichar de chuka hoon.
kewal tiwari
ये अपनी सहेलियों से आगे बढ़ना चाहती हैं जब बुद्धिमानी में नहीं बढ़ सकती तो मूर्खता में बढ़ जाती हैं.
नए जमाने की रफ्तार पर बारीकी से नजर डालने के लिए बधाई..छोटे वाक्यों के प्रवाह का अपना मजा है। लेकिन लड़कियां टीशर्ट के लिए नहीं, आई और यू के बीच फंसे लव में धोखा खाती हैं...और शायद देती भी हैं..
औरत और मर्द के बीच आकर्षण का एक साधारण सा रिश्ता होता है. इसमें न कोई हारता है और न किसी की जीत होती है. लड़की हारी या लड़का जीता, मै यह तो नहीं बता सकता लेकिन यह जरूर कह सकता हूं की आज के दौर की यही कहानी है.
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